भ्रूण को बढ़ने दो कन्या को आने दो
कलि को मत तोड़ो फूल बन जाने दो
फूल को खिलने दो खुशबू बिखर जाने दो
आने वाली प्रतिभाओं की आभा को तुम मत कुच्लो
खिलने से पहले ही कलियों को तुम मत तोड़ो
कन्या तो एक रूप है इसका
और भी रूप हैं कई अनेक
बेटी पत्नी माँ नारी बन
सब रूप में करती स्नेह
देश के भविष्य की रूप रेखा
इनके भी है हाथों में
एक हाथ ही नही रहा
तो दूजा भी कमजोर है
अतः भ्रूण को बढ़ने दो कन्या को आने दो
अगर छायादार पेड़ चाहिए तो हम बीज लगाते हैं
जब कन्या का बीज लगा तो उसे सिंचित क्यों नही कर पाते हैं
कन्या के महत्व को जानो
उसकी प्रतिभा की खुशबू को पहचानो
खुद की एक पहचान बनेगी
माँ पिता की मुस्कान बनेगी
अतः फूल को खिलने दो
खुशबू बिखर जाने दो
सूर्य नभ पर है चमकता
धरा पर माँ का प्यार खनकता
माँ की ममता माँ का प्यार
एक प्यारा नाज़ुक संबंध देता
संबंधों के शब्दकोष की
वर्ण माला को पहचानो
कन्या की आंखों मी देखो
आंखों की भाषा को पढ़ लो
माँ बेटी के संबंधों की
मिठास को तुम पहचानो
कलि को मत तोड़ो फूल बन जाने दो
खिले फूल आतुर हो कहते
हमे भी लहराने दो
अनिता 'निःशब्द '
Saturday, January 12, 2008
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