एक नयी अनुभूति
एक नया एहसास
शायद हुआ है नया वास
आएगा इक दिन वो धर में
बस जायेगा दिल के पास
लड़का हो या लड़की
अपने लिए तो होगा खास
पर जब सुना मैंने किसी से
लड़की का आना उसे कर गया हताश
और कर दिया उसने कन्या भ्रूण का नाश
तो दिल हुआ अति उदास
ओह! नारी का नारी पेर ये कैसा घात
नारी ही बनी नारी की दुश्मन
और किया ऐसा जघन्य अपराध
क्या लड़की होना है एक अभिशाप?
अनिता 'निःशब्द'
Saturday, January 12, 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment