एक नयी अनुभूति
एक नया एहसास
शायद हुआ है नया वास
आएगा इक दिन वो धर में
बस जायेगा दिल के पास
लड़का हो या लड़की
अपने लिए तो होगा खास
पर जब सुना मैंने किसी से
लड़की का आना उसे कर गया हताश
और कर दिया उसने कन्या भ्रूण का नाश
तो दिल हुआ अति उदास
ओह! नारी का नारी पेर ये कैसा घात
नारी ही बनी नारी की दुश्मन
और किया ऐसा जघन्य अपराध
क्या लड़की होना है एक अभिशाप?
अनिता 'निःशब्द'
Saturday, January 12, 2008
कलि को मत तोड़ो फूल बन जाने दो
भ्रूण को बढ़ने दो कन्या को आने दो
कलि को मत तोड़ो फूल बन जाने दो
फूल को खिलने दो खुशबू बिखर जाने दो
आने वाली प्रतिभाओं की आभा को तुम मत कुच्लो
खिलने से पहले ही कलियों को तुम मत तोड़ो
कन्या तो एक रूप है इसका
और भी रूप हैं कई अनेक
बेटी पत्नी माँ नारी बन
सब रूप में करती स्नेह
देश के भविष्य की रूप रेखा
इनके भी है हाथों में
एक हाथ ही नही रहा
तो दूजा भी कमजोर है
अतः भ्रूण को बढ़ने दो कन्या को आने दो
अगर छायादार पेड़ चाहिए तो हम बीज लगाते हैं
जब कन्या का बीज लगा तो उसे सिंचित क्यों नही कर पाते हैं
कन्या के महत्व को जानो
उसकी प्रतिभा की खुशबू को पहचानो
खुद की एक पहचान बनेगी
माँ पिता की मुस्कान बनेगी
अतः फूल को खिलने दो
खुशबू बिखर जाने दो
सूर्य नभ पर है चमकता
धरा पर माँ का प्यार खनकता
माँ की ममता माँ का प्यार
एक प्यारा नाज़ुक संबंध देता
संबंधों के शब्दकोष की
वर्ण माला को पहचानो
कन्या की आंखों मी देखो
आंखों की भाषा को पढ़ लो
माँ बेटी के संबंधों की
मिठास को तुम पहचानो
कलि को मत तोड़ो फूल बन जाने दो
खिले फूल आतुर हो कहते
हमे भी लहराने दो
अनिता 'निःशब्द '
कलि को मत तोड़ो फूल बन जाने दो
फूल को खिलने दो खुशबू बिखर जाने दो
आने वाली प्रतिभाओं की आभा को तुम मत कुच्लो
खिलने से पहले ही कलियों को तुम मत तोड़ो
कन्या तो एक रूप है इसका
और भी रूप हैं कई अनेक
बेटी पत्नी माँ नारी बन
सब रूप में करती स्नेह
देश के भविष्य की रूप रेखा
इनके भी है हाथों में
एक हाथ ही नही रहा
तो दूजा भी कमजोर है
अतः भ्रूण को बढ़ने दो कन्या को आने दो
अगर छायादार पेड़ चाहिए तो हम बीज लगाते हैं
जब कन्या का बीज लगा तो उसे सिंचित क्यों नही कर पाते हैं
कन्या के महत्व को जानो
उसकी प्रतिभा की खुशबू को पहचानो
खुद की एक पहचान बनेगी
माँ पिता की मुस्कान बनेगी
अतः फूल को खिलने दो
खुशबू बिखर जाने दो
सूर्य नभ पर है चमकता
धरा पर माँ का प्यार खनकता
माँ की ममता माँ का प्यार
एक प्यारा नाज़ुक संबंध देता
संबंधों के शब्दकोष की
वर्ण माला को पहचानो
कन्या की आंखों मी देखो
आंखों की भाषा को पढ़ लो
माँ बेटी के संबंधों की
मिठास को तुम पहचानो
कलि को मत तोड़ो फूल बन जाने दो
खिले फूल आतुर हो कहते
हमे भी लहराने दो
अनिता 'निःशब्द '
Saturday, August 11, 2007
संकुचित मानसिकता -लड़के कि आस
लड़के की आस
वंश बढाने की प्यास
अंकुरित होते बीज की ख़त्म कर देती है साँस
एक अंकुरित पौधा हो जाता है नष्ट
पर क्या बुझ पाती है प्यास
यूं संकुचित मानसिकता का आविर्भाव
जन्म देता है कितने दुर्भाव
सोच की धारा का रूक जाता है बहाव
जीवन का बस रह जाता है एक ही पड़ाव
वंश का कैसे हो फैलाव
यही पड़ाव तो है एक भँवर
यहीं विलीन हो जाती है सोचों की लहर
जिसमे ख़त्म हो जाता है जिन्दगी का सफ़र
कन्या भ्रूण ह्त्या की सोच बन जाती है ज़हर
अनिता नि:शब्द
वंश बढाने की प्यास
अंकुरित होते बीज की ख़त्म कर देती है साँस
एक अंकुरित पौधा हो जाता है नष्ट
पर क्या बुझ पाती है प्यास
यूं संकुचित मानसिकता का आविर्भाव
जन्म देता है कितने दुर्भाव
सोच की धारा का रूक जाता है बहाव
जीवन का बस रह जाता है एक ही पड़ाव
वंश का कैसे हो फैलाव
यही पड़ाव तो है एक भँवर
यहीं विलीन हो जाती है सोचों की लहर
जिसमे ख़त्म हो जाता है जिन्दगी का सफ़र
कन्या भ्रूण ह्त्या की सोच बन जाती है ज़हर
अनिता नि:शब्द
भ्रूण हत्या-प्राक्कथन
हमारे समाज की ज्वलंत समस्या है कन्या भ्रूण कि हत्या और बढती दहेज़ प्रथा कि आग मैं जलती नारियाँ। इस समस्या का समाधान भी स्वयं अपने आप में एक बड़ी समस्या है। अनगिनत समाज सेवी संस्थाएं और अखबारों से जुडे पत्रकार अपने अपने तरीके से कार्य कर रहे हैं। जिससे अपराधी लोगों को सजा मिल सके ,जिससे इस तरह के जानलेवा अपराधिक कार्य करने में लोग डरें और अन्य लोगों में भी जागरूकता आये और वे कन्या भ्रूण कि रक्षा और दहेज़ उन्मूलन अभियान में अपना योगदान दे सकें। हम सबों को अपनी क्षमता के अनुसार लोगों में इस विषय मे इस इस क्षेत्र इस क्षेत्र मै कार्य करना चाहिए। और अगर कोई संस्था या लोग हमारे इस अभियान मै हमारे साथ जुडना चाहते हैं तो हमें बहुत ही प्रसन्नता होगी। उत्साहपूर्वक दो हाथों का साथ सौ हाथों के बराबर है। आप सबों से सहयोग की अपेक्षा रखते हैं।
अनिता नि:शब्द
अनिता नि:शब्द
Subscribe to:
Posts (Atom)